मैंने कई बार कि है कोशिश छोटू को मारने कि कई बार मारता हूँ उसे मंत्री कि गाडी के नीचे पर छोटू है कि मरता ही नहीं बस शक्ल बदल लेता है अपनी मारा है मैंने उसे कई बार कभी मंत्रालय के सामने कभी भूख से कभी ठंढ से पर वो मरता नहीं है उसे मारने का दावा करते है कई बुद्धिजीवी और इस देश के महान नेता पर मै देखता हूँ उसेअक्सर उन्ही बुद्धिजीविओं के साथ उसी चाय कि दुकान पर जहाँ अक्सर किये जाते है वादे उसे मारने के पर वो है कि मरता ही नहीं शक्लें बदल लेता है अपनी कभी तौफ़िक़ तो कभी रमुआ बनकर शायद वो अमर हो गया है कि खरीद लिया है उसने उसे मारने वाले सब लोगों को ...
Friday, July 16, 2010
Sunday, August 2, 2009
एक भाषा हुआ करती है
एक भाषा हुआ करती हैजिसमें जितनी बार मैं लिखना चाहता हूं `आंसू´ से मिलता जुलता कोई शब्दहर बार बहने लगती है रक्त की धारएक भाषा है जिसे बोलते वैज्ञानिक और समाजविद और तीसरे दर्जे के जोकरऔर हमारे समय की सम्मानित वेश्याएं और क्रांतिकारी सब शर्माते हैंजिसके व्याकरण और हिज्जों की भयावह भूलें हीकुलशील, वर्ग और नस्ल की श्रेष्ठता प्रमाणित करती हैंबहुत अधिक बोली-लिखी, सुनी-पढ़ी जाती,गाती-बजाती एक बहुत कमाऊ और बिकाऊ बड़ी भाषादुनिया के सबसे बदहाल और सबसे असाक्षर, सबसे गरीब और सबसे खूंख़ार,सबसे काहिल और सबसे थके-लुटे लोगों की भाषा,अस्सी करोड़ या नब्बे करोड़ या ...