Friday, July 16, 2010

क्रिया-प्रतिक्रिया

Friday, July 16, 2010
मैंने कई बार कि है कोशिश
छोटू को मारने कि
कई बार मारता हूँ
उसे मंत्री कि गाडी के नीचे
पर छोटू है कि मरता ही नहीं
बस शक्ल बदल लेता है अपनी
मारा है मैंने उसे कई बार
कभी मंत्रालय के सामने
कभी भूख से
कभी ठंढ से
पर वो मरता नहीं है
उसे मारने का दावा करते है
कई बुद्धिजीवी
और इस देश के महान नेता
पर मै देखता हूँ उसे
अक्सर उन्ही बुद्धिजीविओं के साथ
उसी चाय कि दुकान पर जहाँ
अक्सर किये जाते है वादे
उसे मारने के
पर वो है कि मरता ही नहीं
शक्लें बदल लेता है अपनी
कभी तौफ़िक़ तो कभी रमुआ बनकर
शायद वो अमर हो गया है
कि खरीद लिया है उसने
उसे मारने वाले सब लोगों को
मैंने भी कि है कई बार कोशिश
उसे मारने कि
पर वो मरता नहीं
शायद मेरा हथियार ही अच्छा नहीं
शायद मेरी कलम में वो धार नहीं
वो हँसता है हमेशा मुझपर
लेकिन मुझे हत्या करनी है
मरना है छोटू को
हमेशा के लिए
चाहे कलम फेककर ही सही
पर मैं छोटू के हाथ नहीं बिकूँगा
मुझे हत्या करनी है ......

.........................
रंगनाथ रवि की रचना


छोटू की हत्या मत करो
छोटू को बदलो
हत्या करनी है
तो छोटूवाद की करो
इन छोटूओं के निर्माताओं की करो
निर्माताओं के स्पॉन्सर की करो
इन पर रचे जा रहे नाटकीय स्वांग की करो
हत्या जरूर करो
क्योंकि इनका हृदय परिवर्तन नहीं होता
क्योंकि इनका रवैया परिवर्तित नहीं होता
क्योंकि यही हैं जो खुद को सुधारनेवाले छोटूओं की हत्या करते हैं

..........................................
भास्कर

17 comments:

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

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बाह भाई बाह

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

Tafribaz said...

बाह भाई बाह

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत संवेदनशील रचना

वन्दना said...

बहुत ही गज़ब की रचना है क्रिया और प्रतिक्रिया के साथ्……………शायद कहने को कुछ बचा ही नही।